एक बच्चा जब पैदा होता है तो वो कुछ चीजें प्राकृतिक रूप से अपने साथ लेकर आता है और कुछ वो समय के साथ अपने आसपास के वातावरण से सीखता है। लेकिन उसके घर का और बाहर का वातावरण ये तय करता है कि वो किस दिशा में जाएगा। आज कला के युग में हर पेरेंट्स ज्यादातर यही सोचते है की उनका बच्चा कौन से स्कूल में जाएगा कितने मार्क्स लेगा, कब और कैसे सरकारी नौकरी करना शुरू करेगा। एक बच्चे के पैदा होने से लेकर सेल्फ डिपेंडेंट होने तक के सफर के बीच बहुत सारी घटनाएं हो जाती है कि जो उसकी पूरी पर्सनेलिटी बनती है । उन घटनाओं में बहुत सी बातें है जिनका नीचे वर्णन किया है
1. परिवार अपनी जिम्मेदारी समझे : बच्चे को समझना और समझाना पेरेंट्स की जिम्मेदारी होती है। बच्चों के दिमाग की डेवलपमेंट 3 साल से लेकर 20 साल तक बहुत हद्द तक हो जाती है , इसलिए पेरेंट्स को इस उम्र तक अपने बच्चों से साथ पूरी तरह से involve रहना चाहिए । खुद मे अनुशासन होना भी जरूरी है । बच्चा बहुत सारी चीजे अपने आसपास से अब्ज़र्व करके ही सीखता है । लेकिन इस पर बहुत कम काम हो रहा है । सब एक दूसरे को कोस रहे है, स्कूल वाले घरवालों को और घरवाले स्कूल वाले को। बच्चा कहां जा रहा है, कब आ रहा है, क्या दिनचर्या है इसका ध्यान किसी को नहीं।
2. मोबाइल फोन एक बीमारी : मोबाइल फोन्स का दुरुपयोग एक बहुत बड़ी समस्या बन चुकी है। आजकल मां बाप अपने बच्चों को समय नहीं दे पाते । सब के पास अपनी अपनी वजह है। कुछ को नौकरी से समय नहीं मिल पाता, कई के पास काम का बोझ है और कुछ अपने मोबाइल एडिक्शन की वजह से । इसमे बच्चा भी कहीं न कहीं neglected feel करता है और अपनी ईमोशनल satisfaction के लिए फोन का सहारा लेना शुरू कर देता है। लेकिन कम ज्ञान और अनुभव की वजह से आजकल मोबाईल फोनस का गलत इस्तेमाल होता है। कुछ बच्चे पोर्नोग्राफी, सोशल मीडिया अडिक्शन इतियादी से अपना मानसिक और शारीरक स्वस्थ खराब करते है। फोन का प्रयोग कम से कम करे।
3. शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी: शिक्षा विभाग के लोग भी अपने काम और सोच समय के साथ बदलें। स्कूल को सबसे ज्यादा सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है। बच्चे का व्यवहार, पढ़ाई में रुचि और स्कूल की एक्टिविटीज में इन्वॉल्वमेंट कितनी है ये ध्यान में रखने की जरूरत है। उसके लिए एक अलग से रिपोर्ट कार्ड से बनाए। नशे की विभिन्न प्रकारों से खुद भी जानकारी होना अनिवार्य है। किसी बात का ज्ञान जब होगा तो तभी हम उनके नकारात्मक प्रभावों से बच्चों को बचा पाएंगे।
4. दोस्तों को नजरअंदाज न करें : आजकल बच्चे किसी के साथ भी घूमने, पार्टीज करने चले जाते है। इसी दौर में वो नशे करना शुरू करता है। शुरुआत स्मोकिंग और ड्रिंकिंग से होती है। और धीरे धीरे नए नशे जीवन में आ जाते है। चिट्टे का नशा ऐसा है जिसमें कुछ महीनों तक तो पता ही नहीं चलता कि बच्चा नशा कर रहा है। इसमें सिर्फ शारीरिक बदलाव है जो मदद कर सकते है ये जानने में की बच्चा नशा कर रहा है।
5. सोशली स्वीकार किए हुए नशे: शराब और स्मोकिंग बहुत ही आम नशे माने जाते है जिनको समाज में बहुत गर्व से किया जाता है। शादियों में शराब पीना, शैम्पेन की बोतलें खोलना बहुत आम बात हो गई है। लेकिन यही चीजें बाद में बच्चे को प्रोत्साहित करती है जानलेवा ड्रग्स लेने में। नशा बुरी चीज इसका डर फिर खत्म हो जाता है।
6. भावनात्मक उलझन और करियर का तनाव: इस समय पर सोशल मीडिया की वजह से बहुत से लोगों ने अपनी जीवन को compare करना शुरू करते है । बेवजह की ईर्ष्या, तुलना, और बराबरी करने की होड़ लगी हुई है। इस वजह से कई बार बहुत तनाव में आ जाते है। सही मार्गदर्शन के अभाव के कारण समय पर अपने करियर का चुनाव नहीं कर पाना भी उन्हें परेशान करता है। उस परेशानी से बचने के लिए बच्चे की बार नशे का सेवन शुरू कर देते है। इस समय पर अच्छे साथ और पेरेंट्स का भावनात्मक सपोर्ट बहुत महत्वपुरण है ।
7. योग और अपने पूर्वजों के दिए ज्ञान से भटकाव : आज का युवा पीढ़ी सोशल मीडिया पर ही अपना ज्यादातर समय व्यतीत करती है। उन्हें न ही खाने का पता होता न किसी काम करने का प्लान होता। खानपान मे बहुत तरह junk फूड ने हमारे रोज के खाने मे जगह बना ली है । जिसकी वजह से की तरह की बीमारियाँ उत्पन्न हो रही है। योग के अभाव से शारीरिक और मानसिक स्वस्थ ठीक नहीं रह रहा है अनुशासन की कमी के कारण जीवन में कई तरह की अस्तव्यवस्ता आ जाती है । भगवान के प्रति आस्था और daily rituals जिनके होने से मन मे शांति बनी रहती है उन्हे अपनाना आसान भी है और scientifically सबसे ज्यादा impactful भी है brain के लिए हमारे समाज और संस्कृति को देखते हुए । समर्पण भाव और gratitude जो हमारे अंदर की तरह के positive बदलाव लाता है इन चीजों को अपने जीवन मे जगह दे। यही अनुषाशन अगर पेरेंट्स इम्प्लमेन्ट करंगे तभी बच्चे भी उससी रास्ते को समझ कर चलेंगे ।
Author: Leena Mehta
Profession: Psychologist – Vaishalya Healing, Palampur